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Thursday, 18 August 2016
आरएसएस संघ का खुनी इतिहास.. समय निकाल कर जरूर पड़े
संघ का खूनी इतिहास :-
( पोस्ट थोड़ा लम्बा है पर सच जानने के लिए अवश्य पढ़ें?)
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एक विद्वान विचारक हैं राकेश सिन्हा जी , वह “संघ के विशेषज्ञ” के नाम से लगभग हर टीवी चैनल पर बहस करते रहते हैं और संघ के काले को सफेद करते रहते हैं ।कुछ दिन से हर टीवी डिबेट में यह बता रहे हैं कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक कोई आज का पैदा नहीं है बल्कि 1925 का जन्म लिया अनुभवी संगठन है । सोचा संघ के 90 वर्ष के जीवन का पोस्टमार्टम किया जाए ।
- 1925 कहने का तात्पर्य सिन्हा जी या अन्य संघ के विद्वानों का इसलिए है कि उसी समय इनके एक योद्धा “सावरकर” ने एक संगठन बनाया था जिसका संघ से कोई लेना देना नहीं था सिवाय इसके कि संघ को सावरकर से जहर फैलाने का सूत्र मिला । सावरकर पहले कांग्रेस में थे परन्तु आजादी की लड़ाई में अंग्रेज़ो ने पकड़ कर इनको “आजीवन कैद” की सज़ा दी और इनको “कालापानी” भेजा गया जो आज पोर्ट ब्लेयर( काला पानी) के नाम से जाना जाता है ।संघ के लोगों से अब “वीर” का खिताब पाए सावरकर कुछ वर्षों में ही अंग्रेज़ों के सामने गिड़गिड़ाने लगे और अंग्रेजों से माफी मांग कर अंग्रेजों की इस शर्त पर रिहा हुए कि स्वतंत्रता संग्राम से दूर रहेंगे और अग्रेजी हुकूमत की वफादारी अदा करते उन्होंने कहा कि ” हिन्दुओं को स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने की बजाए अपनी शक्ति देश के अंदर मुसलमानों और इसाईयों से लड़ने के लिए लगानी चाहिए” ध्यान दीजिये कि तब पूरे देश का हिन्दू मुस्लिम सिख एक साथ कंधे से कंधा मिलाकर आजादी के लिए मर रहा था शहीद हो रहा था और तब ना कोई यह सोच रहा था कि हिन्दू मुस्लिम अलग भी हो सकते हैं , तब यह “वीर” देश में आग लगाने की बीज बो रहे थे , जेल से सशर्त रिहा हुए यह वीर देश की आपसी एकता के विरूद्ध तमाम किताबों को लिख कर सावरकर ने अंग्रेजों को दिये 6 माफीनामे की कीमत चुकाई देश के साथ गद्दारी की और आजाद भारत में नफरत फैलाने की बीज बोते रहे ।
- 1947 में देश आजाद हुआ और देश की स्वाधीनता संग्राम आंदोलन के ध्वज को राष्ट्रीय ध्वज बनाने का फैसला स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने लिया तो इसी विचार के लोग इसके विरोध में और अंग्रेजों को वफादारी दिखाते राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे को जला रहे थे और पैरों से कुचल रहे थे और मौका मिलते ही देश के विभाजन के समय हिन्दू – मुस्लिम दंगों में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया और मौका मिलते ही देश के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की हत्या कर दी क्युँकि सावरकर हेडगेवार की यह सोच थी कि इस देश में “गाँधी” के रहते उनके उद्देश्य पूरे नहीं होंगे। संघ के जन्मदाता हेडगेवार और गोवलकर ने गाँधी जी की हत्या करने के बाद (सरदार पटेल ने स्वीकार किया ) अपने विष फैलाने की योजना में लग गये , तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू राष्ट्र के निर्माण में लग गये और संघ के लोग भविष्य के भारत को ज़हर से भरने के औज़ार बनाने लगे , नेहरू पटेल को उदारवादी कहिए या उनकी मूक सहमति , संघ को पैदा होते ही उसके देश विरोधी क्रिया
- कलाप देख कर भी आंखें मूंदे रहे ।इस बीच संघ ने देश की एकता को तोड़ने के सारे वह साहित्यिक हथियार पुस्तकों के रूप में बना लिए जिससे हिन्दू भाईयों की धार्मिक भावना भड़के जिसका मुख्य आधार मुसलमानों से कटुता और मुगलों के झूठे आत्याचार थे , न्यायिक प्रक्रिया में दंड पाए लोगों को भी हिन्दू के उपर किया अत्याचार किया दिखाया गया , शासकीय आदेशों को तोड़ मरोड़कर हिन्दू भाईयों पर हुए अत्याचार की तरह दिखाया गया तथा इतिहास को तोड़ मरोड़कर मुगल शासकों को अत्याचारी बताया कि हिन्दुओं पर ऐसे ऐसे अत्याचार हुआ और औरंगज़ेब को उस अत्याचार का प्रतीक बनाया गया , एक से एक भड़काने वाली कहानियाँ गढ़ी गईं और इसी आधार पर संघी साहित्य लिखा गया पर जिस झूठ को सबसे अधिक फैलाया गया वो था कि ” औरंगज़ेब जब तक 1•5 मन जनेऊ रोज तौल नहीं लेता था भोजन नहीं करता था” अब सोचिएगा जरा कि एक ग्राम का जनेऊ 1•5 मन (60 किलो) कितने लोगों को मारकर आएगा ? 60 हजार हिन्दू प्रतिदिन , दो करोड़ 19 लाख हिन्दू प्रति वर्ष और औरंगज़ेब ने 50 वर्ष देश पर शासन किया तो उस हिसाब से 120 करोड़ हिन्दुओं को मारा बताया गया जो आज भारत की कुल आबादी है और तब की आबादी से 100 गुणा अधिक है ।पर ज़हर सोचने समझने की शक्ति समाप्त कर देती है तो भोले भाले हिन्दू भाई विश्वास करते चले गए ।इन सब हथियारों को तैयार करके संघ अपनी शाखाओं का विस्तार करता रहा और हेडगेवार और गोवलकर एक से एक ब्राह्मणवादी ज़हरीली किताबें लिखते रहे प्रचारित प्रसारित करते रहे जिनका आधार “मनुस्मृति” थी और गोवलकर की पुस्तक “बंच आफ थाट” संघ के लिए गीता बाईबल और कुरान के समकक्ष थी और आज भी है।नेहरू के काल में ही अयोध्या के एक मस्जिद में चोरी से रामलला की मुर्ति रखवा दी गई और उसे बाबर से जोड़ दिया गया जबकि बाबर कभी अयोध्या गये ही नहीं बल्कि वह मस्जिद अयोध्या की आबादी से कई किलोमीटर दूर बाबर के सेनापति मीर बाकी ने बनवाई थी , ध्यान रहे कि उसके पहले बाबरी मस्जिद कभी विवादित नहीं रही परन्तु नेहरू आंख बंद किये रहे ।नेहरू के बाद इंदिरा गांधी का समयकाल प्रारंभ हुआ और सख्त मिजाज इंदिरा गांधी के सामने यह अपने फन को छुपाकर लुक छिप कर अपने मिशन में लगे रहे और कुछ और झूठी कहानियाँ गढ़ी और अपना लक्ष्य निर्धारित किया जो “गोमांस , धारा 370 , समान आचार संहिता , श्रीराम , श्रीकृष्ण जन्मभूमि और काशी विश्वनाथ मंदिर , स्वदेशीकरण थे । इंदिरा गांधी ने आपातकाल में जब सभी को जेल में ठूस दिया तो संघ के प्रमुख बाला साहब देवरस , इंदिरा गांधी से माफी मांग कर छूटे और सभी कार्यक्रम छुपकर करते रहे पर इनको फन फैलाने का अवसर मिला इंदिरा गांधी की हत्या के बाद , तमाम साक्ष्य उपलब्ध हैं कि इंदिरा गांधी की हत्या के बाद भड़के सिख विरोधी दंगों में संघ के लोगों ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया था ।राजीव गांधी बेहद सरल और कोमल स्वभाव के थे और उतने ही विनम्र , जिसे भाँप कर संघियों ने अपना फन निकालना प्रारंभ किया और हिन्दू भाईयों की भावनाओं का प्रयोग करके श्रीराम जन्म भूमि-बाबरी मस्जिद के विवाद को हवा दे दी और आंदोलन चला दिया , पर पहले नरम अटलबिहारी वाजपेयी को मुखौटे के रूप में आगे किया जिसकी स्विकरोक्ती गोविंदाचार्य ने भी अटलबिहारी वाजपेयी को मुखौटा कह कर की , संघ का दोगलापन उजागर करने की कीमत उनको संघ से बाहर करके की गई और वह आजतक बाहर ही हैं । दूसरी तरफ लालकृष्ण आडवाणी तमाम तैयार हथियारों के सहारे हिन्दू भाईयों को उत्तेजित करते रहे जैसे आज योगी साध्वी और तोगड़िया करते हैं ।राजीव गांधी के पास संसद में इतनी शक्ति थी कि संघ को कुचल देते तो यह देश के लिए सदैव समाप्त हो जाते परन्तु सीधे साधे राजीव गांधी कुटिल दोस्तों की बातों को मानकर गलत ढुलमुल फैसलों से संघ को खाद पानी देते रहे , कारसेवा और शिलान्यास के नाम पर राजीव गांधी का इस तरह प्रयोग किया गया कि संघ को फायदा हो और संघ की रखैल भाजपा ने उसका खूब फायदा उठाया और दो सीट से 88 सीट जीत गई ।फिर वीपी सिंह की सरकार बनी भाजपा और वाम मोर्चा के समर्थन से तथा संघी जगमोहन को भेजकर काश्मीर में आग लगा दिया गया ।
- अब सब हथियार और ज़मीन तैयार हो चुकी थी और प्रधानमंत्री नरसिंह राव का समय काल प्रारंभ हुआ जो खुद संघ के प्रति उदार थे , उड़ीसा में पादरी ग्राहम स्टेन्स और उनके दो बच्चों को जलाकर मारने के बाद अंतर्राष्ट्रीय दबाव के बाद संघ ने इसाईयों के प्रति नफरत फैलाने की नीति छोड़कर सारी शक्तियों को देश के मुसलमानों से नफरत फैलाने में लगा दिया , संघ ने प्रधानमंत्री राव की चुप्पी का फायदा उठाया अपने बनाए झूठे हथियारों से हिन्दू भाईयों के एक वर्ग की भावनाएँ भड़काई और अपने साथ जोड़ लिया । साजिश की संसद और उच्चतम न्यायालय को धोखा दिया और अपने लम्पटों के माध्यम से बाबरी मस्जिद 6 दिसंबर को गिरा दी ।
- इसके बाद अटलबिहारी वाजपेयी की सरकार बनी तो सारे जन्म स्थान के मंदिर 370 स्वदेशीकरण सब दफन कर दिया गया और हर छोटे बड़े दंगों में शामिल रहा संघ ने साजिश करके गुजरात में इतिहास का सबसे बड़ा नरसंहार कराया और अपने चरित्र के अनुसार एक नायक बनाया। फिर अपने असली रूप चरित्र और सिद्धांतों के अनुसार उसी असली नायक नरेंद्र मोदी को आगे किया और झूठ और फेकमफाक के आधार पर और आज सत्ता पर कब्जा किया।
- संघ की यह सब राजनीति उत्तर भारत के प्रदेशों के लिए थी क्युँकि मुगलों का शासन अधिकतर उत्तर भारत में ही था। दक्षिण के राज्य इस जहर से अछूते थे इसलिए अब वहाँ भी एक मुसलमान शासक को ढूढ लिया गया और देश की आजादी से आजतक 67 वर्षों तक निर्विवाद रूप से सभी भारतीयों के हृदय में सम्मान पा रहे महान देशभक्त टीपू सुल्तान आज उसी प्रकिया से गुजर रहे हैं जिससे पिछले सभी मुगल बादशाह गुजर चुके हैं , मतलब हिन्दुओं के नरसंहारक बनाने की प्रक्रिया।और आज उनकी जयंती पर हुए विरोध में एक यूवक की हत्या भी कर दी गई।
- सबसे दिलचस्प बात यह है कि जो जुल्मों और लूट का जो इतिहास प्रमाणित रूप से दुनिया के सामने हैं यह उसकी निंदा भी नहीं करते , इस देश को सबसे अधिक लूटने वाले अंग्रेजों की ये कभी आलोचना नहीं करते जो देश की शान “कोहिनूर” तक लूट ले गये , जनरल डायर की आलोचना और जलियांवाला बाग के शहीदों के लिए इनके आँसू कभी नहीं गिरते , आज संघ के पास शस्त्र सहित कार्यकर्ताओं की फौज है जो शहरों में दहशत फैलाने के लिए सेना की तरह फ्लैगमार्च करते हैं , संविधान की किस धारा के अनुसार उन्हे यह अधिकार है यह पता नहीं । भारतीय इतिहास में जुल्म जो हुआ वह अंग्रेज़ों ने किया और उससे भी अधिक सदियों से सवर्णों ने किया दलितों और पिछड़ों पर , जब चाहा जिसे चाहा सरेआम नंगा कर दिया जो इन्हे दिखाई नहीं देता क्योंकि इनको जुल्मों से मतलब नहीं आपस में लड़ाकर देश मे जहर फैलाकर सत्ता पाने से है और उसके लिए देश टूट भी जाए तो इनसे मतलब नहीं।
- इसी लिये कहता हूँ साजिशें करने मे माहिर संघ को “संघमुक्त भारत” करके ही इस देश का भला हो सकता है और यह समय इस अभियान के लिए सबसे उपयुक्त है।
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सत्य यही है कि संघी केवल अंग्रेजों की मुखबिरी करते थे इनका आजादी के स्वतंत्रता संग्राम में कोई योगदान नही है। दूसरो की पैदाईश के बारे में बताने वाले नालायक , मोदी के मोरावतार में मोदी के निकले हुए अश्रु रुपी बीज , चरणचटु अंधभक्त और कीचड़ में पडे हुए कमलगट्टे व संघ की नाजायज औलाद अपनी भाषा मर्यादित रख अन्यथा ऐसे ऐसे शब्द रुपी बाण है कि कानो में बवासीर हो जाएगी। तुम क्या बात करोगे खालिस्तान के बारे मे अबे गधो भिंडरावाले को दमदमी टकसाल का शहीद घोषित करने वाले अकालियो के साथ तुम गठबंधन करके सरकार चलाते हो , अफजल गुरु को काश्शमीर मे शहीद का दर्जा देने वाली पीडीपी के साथ तुम सरकार बनाते हो , बुरहान वानी के घर 10 लाख भिजवाते हो और उसके घर के सदस्य को नौकरी देने की वकालत करने वालो तुम से ज्यादा बडा आतंकवादी कौन हो सकता है जो महात्मा गांधी के हत्यारो की पूजा करते है। राम मंदिर के नाम का चंदा खाकर राम को ही भूलने वालो......बाकी बाद में अभी व्यस्त हूं
Ek tarkik aur gyan vardhak lekh..thanks
www.kyoutubekcom/wac?w=s7swjrjj0
1. इंदिरा गांधी की मृत्यू का कारण गुरूद्वारे में आॅपरेशन ब्ल्यू स्टार चलाना था ।
2. टीपू सुल्तान जो कि एक मुस्लिम शासक था जिसकी तलवार पर आज भी अरबी भाषा में लिखा है की हे खुदा मुंझे सभी हिन्दुओं को मारने की शक्ति प्रदान करो तो वो देश भक्त कैसे हुआ !
3. संघ है तभी भारत में हिन्दुओं का दबदबा है वरना ये गांधी परीवार तो कबसे देश को बेच चुका था! इसका उदाहरण ताशकंद समझोते के समय डाॅ. राजेन्द्र प्रशाद की मृत्यु पर डला हुआ परदा है!
4. मोदी जी के राज में हुए गुजरात दंगों की बदोलत ही तो सभी हिन्दू मोदीजी का साथ देते हैं क्योंकी हिन्दु सबसे डरपोक जाती होती है! इसे डराओ और अपनी तरफ कर लो !!! अगर ये जगह जगह दंगे नां होते तो हिन्दु कभी नहीं डरता और लापरवाही के कारण बरबाद होता रहता ! भला हो मोदीजी का की भारत की कमान संभाली और पूरे विश्व में भारत का नाम रोशन किया !!!
सँविधान को जहरीला बीज कहने वाले गोलवालकर को ,
अपना आदर्श मानता हैं मोदी ,
Jabhi bharat ek mahasatta ban sakta hai..Rss ek kharab bimari hai jo mere bharat desh ko lag gai hai...
मुस्लिमों ने इस देश के लिये क्या किया या संघ ने मुस्लिमों के लिये क्या किया ये जानने के लिये इस हलाला की पैदायश की बातों पर ध्यान ना दें।देश में 60 सालों तक इनके अब्बुओं का ही शासन रहा क्यौं नहीं संघ को बन्द कर दिया।
इस आदमी की बात पर कोई ध्यान ना दें।संघ में जरूर जायें और खुद को शारीरिक रूप से सुदृढ़,मानसिक रूप से सन्तुलित और संस्कारी राष्ट्रभक्त बनाएँ और राष्ट्र की उन्नति में हिस्सा लें।
भारत माता की जय।
do not want to devide this country again then join Sangh SHAKHA
Population SAB cast religion hum 2 hamare 2 Ko Kanoon banai phir dekho khud Shanti AA jaegi
Aur please jo Insaan hoga woh ish soch Ko political ya dharmik roop mat Dena
Aisa na ho Wahi Jamin 10 crore ko anaj dete teh Wahi dharti 134 crore Ko anaj dete hai kaise dete hai AAP SAB jante hai Aisa na ho ek din hum SAB chemical fertilizer khana Suru kar de
Ek example deta hu ek bara SA room hai ushme ek admi rahega woh kaise rahta hoga sochye aur ushe room me 100 admi rakh de woh kaise rahte hoge jawab mil jaega
Jai hind
आये जानने की कोशिश करते हैं गांधी यानी बैरिस्टर, जवाहर लाल नेहरू यानी ये भी बैरिस्टर और सावरकर यानी बैरिस्टर के परीक्षा में पूरे ब्रिटेन में टॉप करने वाले बिना डिग्री वाले बैरिस्टर वीर सावरकर ही है
मेरे दोस्त आप एक बात बताओ की कोई बच्चा अगर 12th या कोई प्रतियोगिता परीक्षा में फेल हो जाय तो सुसाइड कर लेता है मगर ये टॉप करने के बाद भी कुछ नहीं मिला क्यु?
है किसी अंग्रेजी कुत्ते के पास नहीं होगा l
मैं बताता हू l आप लोग इतिहास में पढ़े होंगे टीवी मे फिल्म में भी देखे होंगे कि गांधी नेहरू को हमेशा इज्जत के साथ गिरफ्तार किया जाता था और बाकी को कुत्तों की तरह घसीट के और जेल के भीतर भी आदर पूर्वक व्यवहार किया जाता था क्यु कभी ये सवाल जेहन आया? मेरे आया और उत्तर सुनकर हैरान रह जायेगे और अभी तक कि सभी समस्याओं का कारण समाधान भी समझ जायेगे
आइए जानते हैं कि क्यु ऐसा था जब भी कोई व्यक्ति बैरिस्टर की परीक्षा पास कर लेते थे तब डिग्री देते वकत अंग्रेजी हुकूमत के प्रति वफादारी की संकल्प लेना होता था जिसके लिए सावरकर ने माना कर दिया और उसे डिग्री नहीं दिया गया l
जैसे भारत में वक़ालत की पढ़ाई करने के बाद भारत के संविधान के प्रति वफादारी की कसम खाई जाती है ठीक उसी तरह l और कुछ बोलना पड़ेगा या इसी मे समझ जायेगे
ये तो सावरकर के जीवन की सिर्फ एक घटना थी इसी मे कॉंग्रेस की पोल खोलने के लिए काफी है. मैं बोलना नहीं चाहता था मगर क्या करें l अरे देश में जरा भी राष्ट्र की भावना बचा है न तो सिर्फ संघ के कारण
और ये आरएसएस को बदनाम वाला पक्का किसी मुल्ले या मोहल्ले की पैदाइश होगा। कोई फर्क नही पड़ता हम भी आरएसएस से जुड़े है आरएसएस भारत देश की शान है और भारत के लिए हम अपनी कुर्बानी देते रहेंगे।
जय हिन्द जय भारत
यह लोग बारबार चंगज़खानम तैमूरलंग, खिलजी, महाभारत के धृतराष्ट्र और दुर्योधन के अत्याचार,नरसंहार,"अधर्म" की बात करते है|पर "पुष्यमित्र शुंग" द्वारा की गई राजा बृहद्रथ हत्या और निरपराध बौद्ध भिक्खुं की हत्यावों को नज़र अंदाज़ कर देते है|
दोगल वंशी जमात!
अधर्मि पुश्यमित्र शुंग राजा बनने तक ही नही रुका|उसने हजारों बौद्ध मठ, स्तुप, विहारों और बौद्ध साहित्य, दुर्मिल ग्रंथ को जलाया, हजारों बौद्ध भिक्खुवों की हत्याएं की|बुद्ध धम्म के प्रचार और प्रसार का प्रमुख स्त्रोत जो बौद्ध भिख्खु थे,उनमेसे एक भी भिक्खू जीवित न रहे एसलिए उनको मारकर लाने वालों को सौ सुवर्ण मुद्रा बक्षिस देने का ऐलान किया था| इसका परिणाम यह हुवा कि साकेत (अयोध्या) से बहने वाली नदी का पात्र बौद्ध भिक्खु के कटे सर से इतना भर गया कि इस नदि का नाम उस क्षेत्र तक "सरयुनदी" नामसे जाने जाता है|
पुष्हयमित्र शुंग द्वारा हजारों बुद्ध विहारों को मंदिरों में तकदिल कर दिया,जो आजभी देश के हर कोने में मौजूद है|
मनु प्रेमी आर्य वैदिक ब्राह्मण और उनके संगठन इस काले इतिहास का क्यो नही जिक्र करते जो सत्य है!
उलटा ये लोग जिनको अपना आईडल मानते है उनमेसे वि.दा.सावर एक है| उनकी एक मराठी किताब है,"सहा सोनेरी पाने"| इस पुस्तक में "पुष्यमित्र शुंग" द्वारा जो प्रतिक्रांति की गई उसे सावरकर छ़ सुवर्ण पन्कनों में से एक सुवर्ण पन्ना बताते है| उनके पुर्खों द्वारा जो अन्याय का इतिहास है उसे गलत तर्क देकर सही का दर्जा देते है| और जो गलत है, जिसका कोई ऐतिहासिक आधार नही उसे झुट का सहारा लेकर फैलाते है!
गांधी,"नेहरु",पटेल, राजेंद्र प्रसाद और कॉंग्रेस 'चातुर्वर्ण्य' मनु व्यवस्था के समर्थक थे| यही कारण था कि सर्वपरि सक्षमता के धनि होने के बावजूद़ "डॉ.अंबेड़कर"जी की क्षमतावों का स्वतंत्र भारत के निर्माण हेतु उपयोग नहि किया गया|
उल्टा डॉ.अंबेडकर की संविधान सभा की सदश्यता पार्टिशन के बहाने खत्म कर दी गई| और उनको पाकिस्तान के भू भाग में ढ़केल दिया गया|
देश की दुर्दशा के अपराधी है मुलतत्वादी और उनके क्रिया कलापों को जानबुझकर नज़र अंदाज करने वाली कॉंग्रेस है!